फखर-ए-कौम...

फखर-ए-कौम का खिताब देने की मांग करना केवल एक राजनीतिक प्रपंच : परमजीत सिंह सरना

कुलवंत कौर, संवाददाता 

नई दिल्ली। सिख समुदाय ने गुरु साहिब से लेकर अब तक अपने अधिकारों के लिए अनेक मोर्चे लगाए जिसमें अनगिनत शहीद हुए लेकिन आज तक समुदाय के किसी भी महान व्यक्ति, विद्वान या सिख संगठन ने किसी भी शहीद को फखर-ए-कौम का खिताब देने की मांग नहीं की। यह कहना है शिरोमणि अकाली दल दिल्ली इकाई के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना का। 

यहां जारी एक बयान में सरदार सरना ने कहा कि हरमीत सिंह कालका को अचानक यह ख्याल कैसे आया जो आज श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार गुरदेव सिंह काउंके को पत्र लिखकर फख्र-ए-कौम का खिताब देने की मांग कर रहे हैं, जबकि काउंके जी को शहीद हुए तीन दशक से ज्यादा बीत गये मगर कालका व सिरसा जुंडली को अब तक उनकी याद नहीं आई। ऐसा प्रतीत होता है कि हरमीत सिंह कालका राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए काउंके जी के नाम का प्रयोग कर रहे हैं।

कालका पर हमला बोलते हुए सरदार सरना ने कहा कि दिल्ली कमेटी पर काबिज़ होने के बाद कालका एंड कंपनी ने जो हाल गुरु हरिकृष्ण पब्लिक स्कूल का किया वह किसी से छिपा नहीं है इन लोगों ने दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी में लूटपाट मचा रखी है, बंदी सिंहों की रिहाई के लिए संघर्ष को भी टॉरपीडो करने का काम किया। अब ये लोग गुरु हरिकृष्ण जी के पवित्र तीर्थ स्थल बंगला सााहिब को भारत के अन्य तीर्थ स्थलों की भांति बताकर गुरु साहिब की तौहीन कर रहे हैं।

हरमीत सिंह कालका व उनकी जुंडली को याद रखना चाहिए कि जितने चाहे मर्जी मुखौटे धारण कर लें उनकी असलियत संगत के सामने आ गई है इसलिए संगत अच्छी तरह से जानती है कि वह भाई गुरदेव सिंह काऊंके के नाम का इस्तेमाल केवल अपनी तुच्छ राजनीति के लिए प्रयोग कर रह हैं।

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