सिख विरोधी...

भगवंत मान सरकार का सिख विरोधी चेहरा पुनः सामने आया : परमजीत सिंह सरना

कुलवंत कौर, संवाददाता 

नई दिल्ली। हाल ही में महाराष्ट्र में सिख बच्चों की मॉब लिंचिंग हुई थी और जिसमें हमारे एक बच्चे को अपनी जान गंवानी पड़ी थी और कुछ घायल हुए थे। इस घटना ने हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया है। भारत में, भीड़ की ऐसी हरकतें, खासकर वहां रहने वाले अल्पसंख्यकों के खिलाफ, रोजाना मौत का कारण बन गई हैं। लेकिन सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।

दुनिया भर में रहने वाले सिख पंजाब को अपना पैतृक घर मानते हैं। भारत में और दुनिया में जब भी सिखों के खिलाफ कोई कठिनाई होती है या ऐसी कोई घटना होती है तो पंजाब सरकार चाहे वह किसी भी पार्टी की हो, समय-समय पर आवाज उठाती रही है।

लेकिन भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार का इस मुद्दे पर मुंह तक नहीं खोलना यह साबित करता है कि उस सरकार को सिखों से गहरी नफरत है और पंजाबियों के मुद्दों से उसका कोई लेना-देना नहीं है। वे केवल पंजाब को दूसरे राज्यों में अपनी पार्टी को फैलाने के लिए एक स्वपन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। जिसके लिए पंजाब की बेशकीमती राजधानी को बर्बाद किया जा रहा है। ये विचार दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और दिल्ली से शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने दिए।

सः परमजीत सिंह ने कहा कि अजीत प्रकाशन ग्रुप के प्रबंध संपादक एस बरजिंदर सिंह हमदर्द के पक्ष में बयान देने वाले कैबिनेट के सिख चेहरे एस इंदरबीर सिंह निझार ने कुछ ही घंटों में कैबिनेट मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। वहीं इस तानाशाही सरकार का दिन बीत जाने के बावजूद इस मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार से बात करना तो दूर अभी तक कोई बयान नहीं दिया गया है. जिससे सिद्ध होता है कि यह सरकार सिख विरोधी मानसिकता से भरी है।

इस अवसर पर सभी सिख संगठनों को एक साथ आकर हमारे मासूम बच्चों के लिए न्याय की लड़ाई लड़नी चाहिए और सिखों पर हो रहे बहुपक्षीय हमलों का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रीय शक्ति को एक करना चाहिए और कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

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