वरिष्ठ नेता राहुल गांधी...

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को अवमानना मामले में राहत नहीं

बंसी लाल, वरिष्ठ पत्रकार 

अहमदाबाद। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी मोदी सरनेम को लेकर सूरत कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे थे। सूरत कोर्ट के इस फैसले के बाद राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई थी। बहरहाल जस्टिस हेमंत प्रच्छक छुट्टी के बाद फैसला सुनाएंगे। कोर्ट ने तब तक के लिए राहुल गांधी को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। सजा पर रोक की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित

5 मई उच्च न्यायालय के लिए अंतिम कार्य दिवस है और इसे 5 जून को फिर से खोलने की उम्मीद है।

न्यायमूर्ति श्री प्रच्छक ने कहा, "मैं छुट्टियों के दौरान आदेश पारित करूंगा और छुट्टी के बाद इसे सुनाऊंगा।"

राहुल गांधी के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायाधीश से अंतरिम आदेश पारित करने का अनुरोध किया, लेकिन उसे अस्वीकार कर दिया गया।

सिंघवी ने कहा, "माई लॉर्ड से विनती करता हूं कि कृपया आज कोई फैसला लें।"

माननीय न्यायाधीश ने कहा, "मैंने खुद को स्पष्ट कर दिया है। मैं सभी दलीलें आदि सुनूंगा। मैं छुट्टी के समय का उपयोग आदेश लिखने के लिए करूंगा।"

उच्च न्यायालय ने निचली अदालत को मामले के मूल "रिकॉर्ड और कार्यवाही" को उसके सामने रखने का भी आदेश दिया।

बता दें कि राहुल गांधी ने सूरत कोर्ट के फैसले के खिलाफ 25 अप्रैल को गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया था।

मामले में एक जज के खुद को अलग कर लेने के बाद अब एक नए न्यायाधीश की ओर से मामले की सुनवाई की गई।

राहुल गांधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में अपनी दलील देते हुए कहा था कि जिस कथित अपराध के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दोषी ठहराया गया है और दो साल की जेल की सजा सुनाई गई है, वह न तो गंभीर है और न ही इसमें नैतिक कदाचार शामिल है।

विदित हो कि इससे पहले राहुल गांधी की तरफ से सजा रद्द करने के लिए सूरत कोर्ट में दलील भी पेश की गई थी। उस दौरान राहुल गांधी की तरफ से कोर्ट में दूसरी दलील यह दी गई थी कि मानहानि के मामले में किसी खास व्यक्ति के सम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप स्पष्ट होना चाहिए। आमतौर पर की गई टिप्पणी या बड़े दायरे को समेटने वाली टिप्पणी को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता। कोलार की रैली में राहुल गांधी ने बड़े दायरे को समेटने वाली टिप्पणी की थी। राहुल का ये बयान ठीक वैसा ही है जैसा लोग आम बोलचाल में बोल देते हैं कि 'नेता तो भ्रष्ट होते हैं.' 'पंजाबी लोग तो बड़े झगड़ालू होते हैं.' 'बंगाली लोग काला जादू करते हैं। ऐसे में अगर कोई नेता, पंजाबवासी या बंगालवासी देश की किसी कोर्ट में जाकर मुकदमा कर दे कि इससे मेरी मानहानि हुई है, तो इसे मानहानि नहीं कहा जा सकता।

सूरत कोर्ट में राहुल गांधी के वकील ने कहा था कि ऐसा दावा किया जाता है कि पूरे भारत में 13 करोड़ मोदी हैं। मोदी सरनेम कोई संघ नहीं है, लेकिन कहा गया है कि 13 करोड़ से अधिक मोदी हैं। मोदी कोई मामला नहीं है। गोसाई एक जाति है, और गोसाई जाति के लोगों को मोदी कहा जाता है। राहुल की तरफ से वकील ने कहा था कि मोदी बिरादरी क्या है, इसे लेकर बहुत भ्रम है। अगर हम इस समूह की पहचान करने की कोशिश करते हैं, तो सबूत हमें भ्रमित करते हैं।

ज्ञात हो कि संसद सदस्यता रद्द किए जाने के कुछ दिन बाद ही राहुल गांधी को दिल्ली में अपना सरकारी बंगला भी खाली करना पड़ा था। बंगला खाली करते समय राहुल गांधी ने कहा था कि वो सिर्फ सच बोलने की कीमत चुका रहे हैं और वो आगे भी ऐसे ही सच बोलते रहेंगे। भले ही उन्हें इसके लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े।

Comments