होम्‍योपैथी...

होम्‍योपैथी एड्स से राहत दिलाने में कर रही है मदद

बंसी लाल, वरिष्ठ पत्रकार 

नई दिल्ली। दुनिया में लगभग 38.4 मिलियन लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं और एड्स के पीड़ित 2.4 मिलियन से ज्‍यादा लोग बीमारी के अलावा विरोध और अटकलों से लड़ रहे हैं। लेकिन आखिरकार एड्स क्‍या है? एक्‍वायर्ड इम्‍युनोडेफिशियेन्‍सी सिन्‍ड्रोम या एड्स एक स्‍थायी और संभवत: जीवन के लिये खतरनाक बीमारी है, जो ह्यूमन इम्‍युनोडेफिशियेन्‍सी वायरस (एचआईवी) से होती है। इस बीमारी में मानव शरीर का रोग प्रतिरोधक तंत्र कमजोर हो जाता है और संक्रमणों तथा दूसरे रोगों से लड़ने की उसकी योग्‍यता में दखल पड़ता है। एड्स एचआईवी के संक्रमण की सबसे उन्‍नत अवस्‍था है, जो इलाज न होने पर कई वर्षों में विकसित हो सकती है। इससे कुछ प्रकार के कैंसर, संक्रमण या लंबे समय की गंभीर चिकित्‍सकीय समस्‍याएं हो सकती हैं।

वर्ल्‍ड एड्स डे पहली बार 1988 में मनाया गया था, जिसका लक्ष्‍य था ऐसे समय में एड्स महामारी पर जागरूकता बढ़ाना, जब उसके साथ कई तरह के लांछन जुड़े हुए थे। वर्ल्‍ड एड्स डे एचआईवी के साथ जी रहे लोगों को सहयोग देने और उन असमानताओं को सम्‍बोधित करने के लिये समर्पित है, जिनसे बीमारी को दूर करने की प्रगति में बाधा होती है। शुरूआत से ही एड्स के बारे में कई गलत धारणाएं रही हैं, जो कहती हैं कि यह त्‍वचा के स्‍पर्श या भोजन साझा करने से हो सकता है और इस बीमारी से जुड़ी वर्जना किसी को यह मिथक तोड़ने नहीं देती है। एचआईवी शारीरिक संपर्क से नहीं फैलता है, लेकिन असुरक्षित यौन सम्‍बंध बनाने और संक्रमित व्‍यक्ति की सुई साझा करने से एचआईवी के संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है, क्‍योंकि यह वायरस शरीर के लिक्विड, जैसे रक्‍त और वीर्य में ज्‍यादा पाया जाता है।

एचआईवी गर्भावस्‍था के दौरान शिशु को भी हो सकता है और सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एण्‍ड प्रीवेंशन के मुताबिक एचआईवी संक्रमण के प्रसव से पूर्व ज्‍यादा जोखिम को स्‍तनपान से जोड़ा जाता है। माँ का एआरटी स्‍तन के दूध से संक्रमण के जोखिम को बहुत कम करता है, लेकिन जोखिम फिर भी बना रहता है।होमियोपैथी के मशहूर डॉक्टर बत्रा पद्मश्री , का कहना है कि,वर्ल्ड एड्स डे के दिन ही नहीं हमे ऐसे मरीजों का इलाज हर समय करना होगा।होमियोपैथी प्रभावी तो नही परंतु काफी लाभ मिल सकता है, उन्होंने बताया कि 

होम्‍योपैथी ऐसा औषधीय पेशा है, जो एचआईवी या एड्स के मरीजों के इलाज में महत्‍वपूर्ण सहायता कर सकता है। यह मरीज के रोग प्रतिरोधक तंत्र में जान डालने और समग्र शारीरिक तथा मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाने में सहायक होता है। एड्स के इलाज के लिये होम्‍योपैथी की दवाओं (जैसे साइफिलिनम, सल्‍फर, आर्सेनिक लोडम, सिलिका, ट्यूबरक्‍युलिनम, केली कार्बोनिकम, कैलकेरिया लोडम, बेसिलिनम, आर्सेनिकम एलबम और फॉस्‍फोरस) को एआरटी या एंटीरेट्रोवायरल थेरैपी और दूसरे उपचारों के साथ-साथ इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

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