पारम्परिक कला...

पारम्परिक कला और शिल्पकारों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध तनाएरा ‘परिचय 2022’ का आयोजन 

कुलवंत कौर, संवाददाता 

नई दिल्ली। वर्ष 2017 में अपनी शुरूआत के बाद से टाटा की प्रोडक्ट तनाएरा ने भारतीय हस्तनिर्मित साड़ियों की समृद्ध धरोहर को संरक्षित रखने के लिए उल्लेखनीय यात्रा तय की है।  भारत के समृद्ध टेक्सटाईल्स की धरोहर का जश्न मनाते हुए टाटा की प्रोडक्ट तनाएरा राष्ट्रीय हैण्डलूम दिवस के मौके पर अनुभवात्मक प्रदर्शनी और सेल- ‘परिचय 2022’ के लिए आपको आमंत्रित करती है, जहां आप हस्तनिर्मित साड़ियों का अनुभव पा सकते हैं।

प्रदर्शनी की शुरूआत नेशनल क्राफ्ट म्युज़ियम और हस्तकला एकेडमी (टेक्सटाईल मंत्रालय), प्रगति मैदान, नई दिल्ली में 6 अगस्त को हुई जो 10 अगस्त तक जारी रहेगी। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का उद्घाटन श्री अर्जुन राम मेघवाल, संस्कृति एवं संसदीय मामलों के माननीय केन्द्रीय मंत्री तथा श्री अम्बुज नारायण, चीफ़ एक्ज़क्टिव ऑफिसर, तनाएरा की मौजूदगी में किया गया।

परिचय, भारत के टेक्सटाईल्स की विविध धरोहर से सभी भारतीयों को परिचित कराने के लिए तनाएरा की अनूठी पहल है, जिन्हें अपनी संस्कृति पर गर्व है। ब्राण्ड ने भारत की इस समृद्ध विरासत को संजोने के लिए देश भर के बुनकरों और कारीगरों के साथ मिलकर काम किया है। तनाएरा हस्तनिर्मित से लेकर खास साड़ियों की दुर्लभ और अनूठी रेंज लेकर आती है। प्रदर्शनी में ऐसी कारीगरी और बुनाई को डिस्प्ले पर रखा गया है जिन्हें बहुत कम लोग जाते हैं जैसे फराद प्रिंटिंग, मोइरंगफी, वेंकटगिरी कॉटन जामदानी, कढ़ाई जैसे कसुति नेगी से लेकर मुश्किल बंगाल मसलिन जामदानी, जटिल और उत्तम रंगकट बनारस, बोपारी पल्लु अजरख आदि।

प्रदर्शनी में तनाएरा की सिगनेचर रेंज 2022, 150 साड़ियों के लिमिटेड एडीशन ‘भूगोल’ को भी पहली बार पेश किया गया है। पारखियों की जन्नत कहलाने वाला यह कलेक्शन धरती माता और उनके असंख्य अवतारों जैसे पहाड़ों, नदियों, समुद्रों, वनों और मैदानों से प्रेरित है। एक बात इस रेंज को खास बनाती है, वह यह है कि हर साड़ी कई तकनीकों का संयोजन है। बनारस से लेकर जामदानी, कांथा, फराद प्रिंटिंग, ब्लॉक प्रिंटिंग, आरी कढ़ाई तक, यह न सिर्फ धरती के विविध परिवेशों बल्कि भारत की समृद्ध कारीगरी का जश्न है।

कार्यक्रम के दौरान अपने विचार व्यक्त करते हुए श्री अम्बुज नारायण, चीफ़ एक्ज़क्टिव ऑफिसर, तनाएरा ने कहा, ‘‘नेशनल हैण्डलूम दिवस के सप्ताह में परिचय को प्रस्तुत करते हुए हमें बेहद गर्व का अनुभव हो रहा है। परिचय के साथ हम दुर्लभ भारतीय हस्तकला और कारीगरी की प्रमाणिकता को प्रस्तुत करना चाहते हैं। हमें उम्मीद है कि इसके माध्यम से हम आज की ज़मीन से जुड़ी किंतु प्रगतिशील महिलाओं को समृद्ध कारीगरी की धरोहर के साथ जोड़ सकेंगे और उन्हें गर्व एवं भव्यता के साथ अपने व्यक्तित्व को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान कर सकेंगे।’

अपनी प्रासंगिक पहल वीवरशाला के माध्यम से किस तरह तनाएरा आधारभूत स्तर पर बुनकरों के साथ मिलकर काम कर रही है, इसके बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हमने इसी साल अपनी अनूठी पहल वीवरशाला का लॉन्च किया, जो बुनकरों के लिए बुनियादी सुविधाओं एवं कार्यस्थल को अपग्रेड करने पर ज़ोर देती है, तथा उन्हें गरिमा एवं मर्यादा के साथ आरामदायक और अनुकूल माहौल में काम करने में सक्षम बनाती है।’

‘परिचय’ के तहत ब्राण्ड ने 7 अगस्त रविवार को नेशनल हैण्डलूम दिवस के मौके पर ‘हस्तशिल्प के संरक्षण, धरोहर के संरक्षण’पर उद्योग जगत के दिग्गजों, हस्तकरघा के कल्याण के लिए काम करने वालों और ब्राण्ड के प्रवक्ताओं से विचार आमंत्रित किए। पैनल ने विभिन्न पहलों पर चर्चा की, जिन्हें अपनाकर हमारी स्वदेशी कारीगरी को संरक्षित तथा बुनकर समुदायों को सक्षम बनाया जा सकता है। ब्राण्ड ने वीवरशाला के तहत बुनकर समुदाय द्वारा किए जा रहे कार्यों पर रोशनी डाली। बुनाई की तकनीकों को आधुनिकीकृत करना, साथ ही हाथकरघा की पारम्परिक प्रक्रियाओं को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित बनाए रखना और उत्कृष्टता के लिए इसे बुनकरों के साथ जोड़ना इस पहल का उद्देश्य है। ब्राण्ड वाराणसी, उत्तरप्रदेश और चम्पा, छत्तीसगढ़ के बुनकरों के साथ मिलकर काम कर रही है तथा आगामी महीनों में इस प्रोजेक्ट को देश के अन्य हिस्सों तक भी ले जाना चाहती है।

इस अवसर पैनल पर चर्चा करने वाले दिग्गजों में डॉ. अनामिका पाठक (चेयरपर्सन, टीसीआरसी एवं पूर्व क्युरेटर, नेशनल म्युज़ियम, नई दिल्ली), डॉ. वंदना काबरा भंडारी (एक्स-डीन, एनआईएफटी और लेखक), श्रीमति रितु सेठी (चेयरपर्सन, क्राफ्ट रिवाइवल ट्रस्ट), श्रीमति अंजना सोमानी (पूर्व अध्यक्ष, दिल्ली क्राफ्ट काउन्सिल), श्री अंबुज नारायण- चीफ़ एक्ज़क्टिव ऑफिसर, तनाएरा और श्री बी.बी. पॉल- पूर्व डायरेक्टर, बुनकर सेवा केन्द्र- परिधान मंत्रालय शामिल थे। 5 दिवसीय प्रदर्शनी में टेक्सटाईल विशेषज्ञों, साड़ी प्रेमियों और हस्तकरघा प्रेमियों ने हिस्सा लिया तथा प्रदर्शनी को खूब सराहा।

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