वकीलों से रायशुमारी...

वकीलों से रायशुमारी करने से रोकना संविधान का उल्लंघन : सरना

कुलवंत कौर, संवाददाता 

नई दिल्ली। शिरोमणि अकाली दल दिल्ली इकाई के अध्यक्ष व दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सरदार परमजीत सिंह सरना ने कहा है कि भारत के संविधान में प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा की गई है। जब तक कोई भी व्यक्ति अदालत में आरोपी साबित नहीं हो जाता तब तक उस व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता और न ही दोषी माना जाना चाहिए। इसी प्रकार हमारे संविधान के अनुच्छेद 22 के माध्यम से किसी भी कैदी को अपने वकील से परामर्श करने का अधिकार दिया गया है।

उन्होंने कहा कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पंजाब सरकार सिख युवा नेता भाई अमृतपाल सिंह और उनके साथियों के इन अधिकारों को कुचलने का प्रयास कर रही है क्योंकि मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि भाई अमृतपाल पत्र के जरिए आरोप लगाया है कि पंजाब सरकार के हस्तक्षेप के कारण उन्हें वकीलों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। यह स्पष्ट तौर पर संविधान का उल्लंघन है।

सरदार सरना ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की कोई विचारधारा हो सकती है व उससे सहमत या असहमत हुआ जा सकता है क्योंकि हमारा संविधान सभी को अभिव्यक्ति की आजादी देता है, किसी को उसके अलग-अलग राजनीतिक विचारों के कारण निशाना बनाना अन्यायपूर्ण व संविधान की मूल भावना के विपरीत है। इसे केवल व्यक्तिगत द्वेष ही कहा जा सकता है कि सरकार ने उन सभी सिख युवाओं को मानसिक रूप से परेशान करने के लिए पंजाब से बहुत दूर जेलों में रखा है और अब वकीलों को भी उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है ताकि वह सही ढंग से अपने केसों की पैरवी न कर सकें यह तुरंत बंद होना चाहिए।

उन्होंने केन्द्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप करे तथा मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित बनाते हुए भाई अमृतपाल सिंह और उनके साथियों को बिना किसी देरी के पंजाब की जेल में स्थानांतरित करें साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि उन सभी युवाओं को नियमों के अनुसार परिवार के सदस्यों और वकीलों से मिलवाया जाए ताकि वे अपनी पैरवी ठीक प्रकार से कर सकें क्योंकि जहां यह न्यायिक व्यवस्था में विश्वास के लिए जरूरी है वहीं हमारे संविधान की मूल भावना को जीवित रखने के लिए अति आवश्यक है।

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